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Sunday, 9 December 2012

hanuman ji aarti...



आरती कीजै हनुमान लला की
आरती कीजै हनुमान लला की .दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..
जाके बल से गिरिवर काँपेरोग दोष जाके निकट न झाँके ।
अंजनि पुत्र महा बलदायीसंतन के प्रभु सदा सहायी ..आरती कीजै हनुमान लला की .
दे बीड़ा रघुनाथ पठायेलंका जाय सिया सुधि लाये ।
लंका सौ कोटि समुद्र सी खाईजात पवनसुत बार न लाई ..आरती कीजै हनुमान लला की .
लंका जारि असुर संघारेसिया रामजी के काज संवारे ।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारेआन संजीवन प्राण उबारे ..आरती कीजै हनुमान लला की .
पैठि पाताल तोड़ि यम कारेअहिरावन की भुजा उखारे ।
बाँये भुजा असुरदल मारेदाहिने भुजा संत जन तारे ..आरती कीजै हनुमान लला की .
सुर नर मुनि जन आरति उतारेजय जय जय हनुमान उचारे ।
कंचन थार कपूर लौ छाईआरती करति अंजना माई ..आरती कीजै हनुमान लला की .
जो हनुमान जी की आरति गावेबसि वैकुण्ठ परम पद पावे ।
आरती कीजै हनुमान लला की .दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..

Saturday, 1 December 2012

आरती कीजे हनुमान लाला की …… aarti ki jai hanuman lala ki




आरती कीजे हनुमान लाला की  । दुष्ट दालान रघुनाथ कला की ।
जा के बल से गिरिवर काँपे । रोग दोष जाके निकट न झाँपे।
अनजानी पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई।
आर्ट कीजे  हनुमान लाला की ।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारी सिया सुधि  लाये ।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत  बार न लाई।।
आरती कीजे हनुमान लाला की।।

लंका जारी असुर संघारे । सिया राम जी के काज संवारे \
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे ।
आरती कीजे हनुमान लाला की ।।

पैठी पटल तोरी जमकारे । अहिरावन की भुजा उखारे ।।
बाएं भुजा असुरदल मारे । दाहिने भुजा संतजन तारे ।
आरती कीजे हनुमान लाला की ।

सुर नर मुनि जन आरती उतारे । जय जय जय हनुमान जी उचारे ।।
कंचन थर कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
आरती कीजे हनुमान लला की ।।

जो हनुमानजी की आरती गावे । बसी बैकुंठ परम पद पावे।
लंका विध्वंस किये रघुराई  । तुलसीदास प्रभु कीर्ति गाई।
आरती कीजे हनुमान लला की ।।

 

Friday, 30 November 2012

ॐ जय जगदीश हरे….om jai jagdish hare



ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश…
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ ॐ जय जगदीश…
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश…
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे।
करुणा हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश…
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश…