Wednesday, 23 April 2014

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान

      देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान
      कितना बदल गया इनसान कितना बदल गया इनसान
      सूरज न बदला चांद न बदला ना बदला रे आसमान
      कितना बदल गया इनसान कितना बदल गया इनसान

               आया समय बड़ा बेढंगा
               आज आदमी बना लफ़ंगा
               कहीं पे झगड़ा कहीं पे दंगा
               नाच रहा नर हो कर नंगा
               छल और कपट के हाथों अपना
               बेच रहा ईमान, कितना ...

               राम के भक्त रहीम के बंदे
               रचते आज फ़रेब के फंदे
               कितने ये मक्कर ये अंधे
               देख लिये इनके भी धंधे
               इन्हीं की काली करतूतों से
               बना ये मुल्क मशान, कितना ...

               जो हम आपस में न झगड़ते
               बने हुए क्यों खेल बिगड़ते
               काहे लाखों घर ये उजड़ते
               क्यों ये बच्चे माँ से बिछड़ते
               फूट\-फूट कर क्यों रोते
               प्यारे बापू के प्राण, कितना ...


Monday, 24 March 2014

dekh sudama ki deen dasha karouna karke karuna nidhi roe .....


dekh sudama ki deen dasha karouna karke karuna nidhi roe 
pani paraat ko haath chhuyo nhi nainan k jal so pag dhoye 
pani paraat ko haath chhuyo nhi nainan k jal so pag dhoye

JaI Balaji Maharaj

Friday, 21 February 2014

maiya mori main nahin makhan khayo...मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो



मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो,

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुवन मोहिं पठायो ।
चार पहर बंसीबट भटक्यो, साँझ परे घर आयो ॥
मैं बालक बहिंयन को छोटो, छींको किहि बिधि पायो ।
ग्वाल बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो ॥
तू जननी मन की अति भोरी, इनके कहे पतिआयो ।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो ॥
यह लै अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो ।
'सूरदास' तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो ॥



Jai Balaji Maharaj

Sunday, 2 February 2014

मंगल भवन अमंगल हारी


                                         मंगल भवन अमंगल हारी
                                          द्रवहु सुदसरथ अचर बिहारी
                                   राम सिया राम सिया राम जय जय राम - २

हो, होइहै वही जो राम रचि राखा
को करे तरफ़ बढ़ाए साखा
हो, धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपद काल परखिये चारी
हो, जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू
सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू
हो, जाकी रही भावना जैसी
रघु मूरति देखी तिन तैसी
रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई
राम सिया राम सिया राम जय जय राम
हो, हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता
कहहि सुनहि बहुविधि सब संता
राम सिया राम सिया राम जय जय राम

Friday, 17 January 2014

natwar nagar nanda..नटवर नगर नंदा

नटवर नगर नंदा, भजो रे मन गोविंदा।
श्यामसुंदर मुख चंदा, भजो रे मन गोविंदा॥ टेर

तू ही नटवर,तू ही नगर, तू ही बाल मुकुंदा ॥
सब देवं मे कृष्ण बड़े है, ज्यू तारा बिच चंदा॥
सब सखियाँ मे राधाजी बड़ी है, ज्यू नदिया बिच गंगा॥
ध्रुव तारे, प्रह्लाद उबारे, नर सिंह रूप धरंता॥
काली दह मे नाग ज्यू नाथो, फान-फान निरत करंता॥
वृन्दावन मे रास रचियो, नाचत बाल मुकुंदा॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, काटो जम का फंदा॥

Thursday, 2 January 2014

bajrang baan.....बजरंग बाण


जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख करहु निपाता॥
जै हनुमान जयति बल-सागर। सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकरसुवन बीर हनुमंता॥
बदन कराल काल-कुल-घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाइ कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥